आज शब्दों को समेटते हुए,
पूछती हूँ....
अपने शब्दों से,
कि ये मुझे सम्हालते है...
या अपने शब्दों में....
बिखेर देते है....
गर मेरे साथ है तो....क्यों...
कई मोड़ पर,
ये मुझे तन्हा छोड़ देते है.....
कोई जवाब नही दिया,
मेरे शब्दों ने...
या यूँ कहूँ जो जवाब था....
उसके लिये मेरे शब्दों के पास भी,
शब्द ही नही थे.....
पूछती हूँ....
अपने शब्दों से,
कि ये मुझे सम्हालते है...
या अपने शब्दों में....
बिखेर देते है....
गर मेरे साथ है तो....क्यों...
कई मोड़ पर,
ये मुझे तन्हा छोड़ देते है.....
कोई जवाब नही दिया,
मेरे शब्दों ने...
या यूँ कहूँ जो जवाब था....
उसके लिये मेरे शब्दों के पास भी,
शब्द ही नही थे.....
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-05-2015) को "गूगल ब्लॉगर में आयी समस्या लाखों ब्लॉग ख़तरे में" {चर्चा अंक - 1969} पर भी होगी।
ReplyDelete--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
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बहुत सुंदर प्रस्तुति ॥
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteथोडे में बहुत कह दिया.
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